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स्तोत्र 100:5
सरल हिन्दी बाइबल
HCV
यहोवाह भले हैं; उनकी करुणा सदा की है; उनकी सच्चाई का प्रसरण समस्त पीढ़ियों में होता जाता है.
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स्तोत्र 100:4
धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में और की स्तुति-आराधना के भाव में उनके आंगनों में प्रवेश करिये; उनकी महिमा को धन्य कहिये.
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स्तोत्र 100:2
यहोवाह की आराधना आनंदपूर्वक की जाए; हर्ष गीत गाते हुए उनकी उपस्थिति में प्रवेश किया जाए.
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स्तोत्र 100:3
यह समझ लीजिए कि स्वयं यहोवाह ही परमेश्वर हैं. हमारी रचना उन्हीं ने की है, स्वयं हमने नहीं; हम पर उन्हीं का स्वामित्व है. हम उनकी प्रजा, उनकी चराई की भेड़ें हैं.
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