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स्तोत्र 53:1
सरल हिन्दी बाइबल
HCV
मूर्ख मन ही मन में कहते हैं, “परमेश्वर हैं ही नहीं.” वे सभी भ्रष्ट हैं और उनकी जीवनशैली घिनौनी है; ऐसे कोई भी नहीं, जो भलाई करते हों.
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स्तोत्र 53:2
स्वर्ग से परमेश्वर मनुष्यों पर दृष्टि डालते हैं इस आशा में कि कोई तो होंगे, जो बुद्धिमान हैं, जो परमेश्वर की खोज करते हों.
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स्तोत्र 53:3
सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्ट हो चुके हैं; कोई भी सत्कर्म परोपकार नहीं करते, हां, एक भी नहीं.
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