थोड़ेक रोज हमिज् दो हुँनि अनाकनी इञोःनय बकिन अखरी रे मन रे बिचार केते कथालअय, ‘इञः ना परमेसर बोरोवायाइञ जोटोः न होड़कु रआ खेयाल दोहोयइञ, सेकरो रे नुई रंडियाही इञः बितलाव इञोगीञय, हिनाते हुँनि रआ नेययइञ चुकावा, कोवन दो नुई जिधा-जिधा वेज् कोते इञः परेसन किञय।’”