स्तोत्र 20
20
स्तोत्र 20
संगीत निर्देशक के लिये. दाविद का एक स्तोत्र.
1संकट के समय यहोवाह आपकी प्रार्थना का उत्तर दें;
याकोब के परमेश्वर में आपकी सुरक्षा हो.
2वह अपने पवित्र निवास में से आपके लिए सहायता प्रदान करें,
ज़ियोन से आपकी सहायता का प्रबंध हो.
3परमेश्वर आपकी समस्त बलियों का स्मरण रखें,
आपकी अग्निबलि उन्हें स्वीकार्य हो.
4वह आपके हृदय के मनोरथ को पूर्ण करें,
आपकी समस्त योजनाएं सफल हों!
5आपके उद्धार होने पर हम हर्षोल्लास में जय जयकार करेंगे,
तथा अपने परमेश्वर के नाम में ध्वजा ऊंची करेंगे.
हमारी कामना है कि यहोवाह
आपकी सारी प्रार्थनाएं सुनकर उन्हें पूर्ण करें.
6अब मुझे यह आश्वासन प्राप्त हो गया है:
कि यहोवाह अपने अभिषिक्त को सुरक्षा प्रदान करते हैं.
वह अपने पवित्र निवास से
अपनी भुजा की सुरक्षा देने वाली सामर्थ्य के द्वारा उन्हें प्रत्युत्तर देते हैं.
7कुछ लोगों को रथों का, तो कुछ को अपने घोड़ों पर भरोसा है,
किंतु हमें भरोसा है यहोवाह, हमारे परमेश्वर के नाम पर.
8वे लड़खड़ाते हैं और उनका पतन हो जाता है,
किंतु हमारी जय होती है और हम स्थिर रहते हैं.
9हे यहोवाह, महाराजा को विजय प्रदान करें!
हम जब भी पुकारें, हमें प्रत्युत्तर दें!
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Holy Bible, Hindi Contemporary Version™ | Copyright © 2016, 2019, 2026 by Biblica, Inc. | Used with permission. All rights reserved worldwide.
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संगीत निर्देशक के लिये. दाविद का एक स्तोत्र.
1संकट के समय यहोवाह आपकी प्रार्थना का उत्तर दें;
याकोब के परमेश्वर में आपकी सुरक्षा हो.
2वह अपने पवित्र निवास में से आपके लिए सहायता प्रदान करें,
ज़ियोन से आपकी सहायता का प्रबंध हो.
3परमेश्वर आपकी समस्त बलियों का स्मरण रखें,
आपकी अग्निबलि उन्हें स्वीकार्य हो.
4वह आपके हृदय के मनोरथ को पूर्ण करें,
आपकी समस्त योजनाएं सफल हों!
5आपके उद्धार होने पर हम हर्षोल्लास में जय जयकार करेंगे,
तथा अपने परमेश्वर के नाम में ध्वजा ऊंची करेंगे.
हमारी कामना है कि यहोवाह
आपकी सारी प्रार्थनाएं सुनकर उन्हें पूर्ण करें.
6अब मुझे यह आश्वासन प्राप्त हो गया है:
कि यहोवाह अपने अभिषिक्त को सुरक्षा प्रदान करते हैं.
वह अपने पवित्र निवास से
अपनी भुजा की सुरक्षा देने वाली सामर्थ्य के द्वारा उन्हें प्रत्युत्तर देते हैं.
7कुछ लोगों को रथों का, तो कुछ को अपने घोड़ों पर भरोसा है,
किंतु हमें भरोसा है यहोवाह, हमारे परमेश्वर के नाम पर.
8वे लड़खड़ाते हैं और उनका पतन हो जाता है,
किंतु हमारी जय होती है और हम स्थिर रहते हैं.
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हम जब भी पुकारें, हमें प्रत्युत्तर दें!
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