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स्तोत्र 1:1-2
सरल हिन्दी बाइबल
HCV
कैसे धन्य हैं वह पुरुष जो दुष्टों की सम्मति का आचरण नहीं करते, न पापियों के मार्ग पर खड़े रहते और न ही उपहास करने वालों की बैठक में बैठते हैं, इसके विपरीत उनका उल्लास यहोवाह की व्यवस्था का पालन करने में है, उसी का मनन वह दिन-रात करते रहते हैं.
तुलना
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स्तोत्र 1:3
वह बहती जलधाराओं के तट पर लगाए गए उस वृक्ष के समान हैं, जो उपयुक्त ऋतु में फल देता है जिसकी पत्तियां कभी मुरझाती नहीं. ऐसे पुरुष जो कुछ करते हैं उसमें वह सफल होते हैं.
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स्तोत्र 1:6
निश्चयतः यहोवाह धर्मियों के आचरण को सुख समृद्धि से सम्पन्न करते हैं, किंतु दुष्टों को उनका आचरण ही नष्ट कर डालेगा.
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