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मत्तियाह 11:7-30

मत्तियाह 11:7-30 HCV

जब योहन के शिष्य वहां से जा ही रहे थे, प्रभु येशु ने भीड़ से योहन के विषय में कहना प्रारंभ किया, “आप लोगों की आशा बंजर भूमि में क्या देखने की थी? हवा में हिलते हुए सरकंडे को? यदि यह नहीं तो फिर क्या देखने गए थे? कीमती वस्त्र धारण किए हुए किसी व्यक्ति को? जो ऐसे वस्त्र धारण करते हैं उनका निवास तो राजमहलों में होता है. आप लोग क्यों गए थे? किसी भविष्यवक्ता से भेंट करने? हां! मैं आप लोगों को बता रहा हूं कि यह वह हैं, जो भविष्यवक्ता से भी बढ़कर हैं यह वह हैं जिनके विषय में लिखा गया है: “ ‘मैं अपने संदेशवाहक को आप लोगों के आगे भेज रहा हूं, जो आप लोगों के आगे-आगे जाकर आप लोगों के लिए मार्ग तैयार करेंगे.’ सच तो यह है कि आज तक जितने भी मनुष्य हुए हैं उनमें से एक भी बापतिस्मा देने वाले योहन से बढ़कर नहीं. फिर भी स्वर्ग-राज्य में छोटे से छोटे व्यक्ति भी योहन से बढ़कर हैं. बापतिस्मा देने वाले योहन के समय से लेकर अब तक स्वर्ग-राज्य प्रबलतापूर्वक फैल रहा है और आकांक्षी-उत्साही व्यक्ति इस पर अधिकार कर रहे हैं. भविष्यद्वक्ताओं तथा व्यवस्था की भविष्यवाणी योहन तक ही थी. यदि आप लोग इस सच में विश्वास कर सकें तो सुनिए: योहन ही वह एलियाह हैं जिनका दोबारा आगमन होना था. जिनके सुनने के कान हों, वह सुन लें. “इस पीढ़ी की तुलना मैं किससे करूं? यह बाजारों में बैठे हुए उन बालकों के समान है, जो पुकारते हुए अन्यों से कह रहे हैं: “ ‘जब हमने आप लोगों के लिए बांसुरी बजाई, आप लोग नहीं नाचे; हमने शोक गीत भी गाए, फिर भी आप लोग नहीं रोए.’ योहन रोटी नहीं खाते, और दाखरस नहीं पीते थे. इसलिये लोगों ने घोषणा की, ‘उनमें भूत है.’ मानव-पुत्र खाते-पीते आए, और उन्होंने घोषित कर दिया, ‘अरे, वह तो पेटू और पियक्कड़ हैं; वह तो चुंगी लेनेवालों और पापियों का मित्र हैं!’ फिर भी ज्ञान अपने कामों से सही साबित होता है.” येशु ने अधिकांश आश्चर्यकर्म इन्हीं नगरों में किए थे; फिर भी इन नगरों ने मन फिराव नहीं किया था, इसलिये येशु इन नगरों को धिक्कारने लगे. “धिक्कार है तुझ पर कोराज़ीन! धिक्कार है तुझ पर बैथसैदा! ये ही आश्चर्यकर्म, जो तुम में किए गए हैं यदि सोर और सीदोन नगरों में किए जाते तो वे विलाप-वस्त्र पहन, सिर पर राख डाल कब के मन फिराव कर चुके होते! फिर भी मैं कहता हूं, सुनिए: न्याय-दिवस पर सोर और सीदोन नगरों का दंड आप लोगों के दंड से अधिक सहने योग्य होगा. और कफ़रनहूम, तू! क्या तू स्वर्ग तक ऊंचा किए जाने की आशा कर रहा है? अरे! तुझे तो अधोलोक में उतार दिया जाएगा क्योंकि जो आश्चर्यकर्म तुझमें किए गए, यदि वे ही सोदोम नगर में किए गए होते तो वह आज भी बना होता. फिर भी आज जो मैं कह रहा हूं उसे याद रख: न्याय-दिवस पर सोदोम नगर का दंड तेरे दंड से अधिक सहने योग्य होगा.” यह वह अवसर था जब येशु ने इस प्रकार कहा: “पिता! स्वर्ग और पृथ्वी के स्वामी, मैं आपकी स्तुति करता हूं कि आपने ये सभी सच बुद्धिमानों और ज्ञानियों से छुपा रखे और नन्हे बालकों पर प्रकट कर दिए क्योंकि पिता, आपकी दृष्‍टि में यही अच्छा था. सच है, पिता, क्योंकि इसी में आपको परम संतोष था. “मेरे पिता द्वारा सब कुछ मुझे सौंप दिया गया है. पिता के अलावा कोई व्यक्ति पुत्र को नहीं जानते और न ही कोई व्यक्ति पिता को जानते हैं, सिवाय पुत्र के तथा वे, जिन पर वह प्रकट करना चाहें. “आप सभी लोग, जो थके हुए तथा भारी बोझ से दबे हैं, मेरे पास आइए, आप लोगों को विश्राम मैं दूंगा. मेरा जूआ अपने ऊपर ले लीजिए और मुझसे सीखिये क्योंकि मैं दीन और हृदय से नम्र हूं और आप लोगों को मन में विश्राम प्राप्‍त होगा क्योंकि सहज है मेरा जूआ और हल्का है मेरा बोझ.”

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