रोमियों 6:1-7
रोमियों 6:1-7 HCV
तो फिर हम क्या कहें? क्या हम पाप करते जाएं कि अनुग्रह बहुत होता जाए? नहीं! बिलकुल नहीं! यह कैसे संभव है कि हम, जो पाप के प्रति मर चुके हैं, उसी में जीते रहें? कहीं तुम इस सच्चाई से अनजान तो नहीं कि हम सभी, जो मसीह येशु में बापतिस्मा ले चुके हैं, उनकी मृत्यु में बापतिस्मा लिए हुए हैं? इसलिये मृत्यु के बापतिस्मा में हम उनके साथ दफनाए जा चुके हैं कि जिस प्रकार मसीह पिता के प्रताप में मरे हुओं में से जीवित किए गए, हम भी जीवन की नवीनता में व्यवहार करें. यदि हम येशु मसीह की मृत्यु की समानता में उनके साथ जोड़े गए हैं तो निश्चित ही हम उनके पुनरुत्थान की समानता में भी उनके साथ जोड़े जाएंगे. हमें यह मालूम है कि हमारा पहले का मनुष्यत्व मसीह के साथ ही क्रूसित हो गया था कि हमारे पाप का शरीर निर्बल हो जाए और इसके बाद हम पाप के दास न रहें क्योंकि जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी, वह पाप की अधीनता से मुक्त हो चुका है.



