सृष्ट्याः आदौ शब्दः (वचनम् वा) आसीत्, शब्दः परमेश्वरेण सह आसीत् शब्दः एव परमेश्वरः आसीत्।
यूहन्नः 1 पढ़िए
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पांच दिन
हमारा संसार ज़्यादातर समयों में अनिश्चित व उथल पुथल जान पड़ता है। यदि परमेश्वर के पुत्र, यीशु न होते तो, हमारे पास कोई आशा नहीं होती। हर एक क्रिसमस हमें इम्मानुएल रूपी उपहार की याद दिलाता है- परमेश्वर का हमारे साथ होना एक उपहार है जो हमेशा बना रहता है। हम अब से लेकर सर्वदा तक कभी भी अकेले नहीं हैं। यह हमारे लिए एक ख़ुशी की बात है।
क्रिसमस अपने आप को नज़दीकी से देखने और यह देखने का एक सुन्दर समय होता है कि किस प्रकार से यीशु मसीह के इस धरती पर आने की वास्तविकता हमारे जीवनों को बदल देती है। स्वर्ग ने धरती पर चढ़ाई की और उसे हमेशा के लिए बदल दिया। हमारा जीवन कठिन या दुविधाजनक हो सकता है लेकिन यीशु के साथ रहते हुए वह बेमकसद नहीं हो सकता है।
5 दिन
जबकि हम एडवेंट में प्रवेश कर रहे हैं, यीशु के जन्म उत्सव की प्रतीक्षा और तैयारी कर रहे हैं, क्रिसमस के लिए अपने दिलों को तैयार करते हैं, तो सन्त यूहन्ना के शब्द हमें यीशु के ईश्वरीय स्वभाव और अनन्त अस्तित्व की घोषणा सुनाते हैं, जो हमारे बीच 'अपना डेरा खड़ा करने' के लिए आया था।
6 दिन
छह दिन डॉ.रमेश रिचर्ड के साथ बिताएं, जो RREACH (वैश्विक स्तर पर सुसमाचार सुनाने वाली सेवकाई) के अध्यक्ष और डालास थियोलोजिकल सेमिनरी के आचार्य हैं, जो हमें मसीह की ईश्वरीयता और उसकी मानवता से सम्बन्धित समयोचित प्रकाशन प्रदान करेगें। अपने हृदय को कुवांरी से जन्म लेने तथा मसीही जीवन में इसके आशय के महत्व पर चिन्तन करते हुए क्रिमसस के पर्व को मनाने के लिए तैयार करें।
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