Après avoir jeûné pendant quarante jours et quarante nuits, il eut faim.
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4 दिन
अब जब क्रिसमस बीत चुका है, हम उस अजीब से “बीच के वक़्त” में हैं—जहाँ त्यौहार की सारी रौनक और ख़ुशी ख़त्म हो चुकी है, लेकिन ज़िंदगी फ़िर से अपनी रफ़्तार में लौटी नहीं है। कभी-कभी हमारी रूहानी ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही लगती है—एक “बीच के वक़्त” की जगह में फँसी हुई। तो क्यों न इन दिनों का इस्तेमाल उन चार लोगों पर मनन करने के लिए करें जो बाइबल में भी अपने ज़िंदगी के “बीच के वक़्त” से गुज़रे हैं?
नौ दिन
इस दुविधाजनक समय में मसीह को और गहराई से जानने और इस अनिश्चित समय में भय से बढ़कर भरोसा करने का चुनाव करें। हम विश्वास करते हैं जब आप इस योजनाबद्ध अध्ययन का अनुपालन करेगें तो आप भविष्य में एक नये आत्म विश्वास के साथ प्रवेष करेगें, फिर चाहे रोज़मर्रा की परिस्थितियां जैसी भी हों।
7 दिन
दुआ बहुत ज़रूरी है—ये तो हम सब जानते हैं—लेकिन एक पल ठहर कर ख़ुद को ये पूछना भी अहम है कि, “क्यों?” इस पढ़ने की योजना में हम सात गहरे वजहों की तलाश करेंगे जिनसे एक मज़बूत दुआ की ज़िंदगी बनाई जा सके। इस सफ़र के दौरान, हो सकता है आपको कुछ ऐसे हैरान कर देने वाले फ़ायदे नज़र आएँ जिनकी उम्मीद आपने कभी न की हो।
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