gi gwune gwun ŋəṯulo ŋilbəḏəṯɩjo na ŋwuləṯi ŋutu; na gwun gwate ŋəṯulo no namɩni ŋun ŋəṯulo ŋulapa lugwun.
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चार दिन
एक ज़बरदस्त कहानी किसे पसंद नहीं आती? एक्शन हो या रोमांस, सस्पेंस या थ्रिलर, हम भारतीयों को हमारी फिल्में और उनसे जुड़ी कहानियां बहुत पसंद हैं। यीशु को भी कहानियां पसंद थीं! एक बात को साबित करने के लिए उन्होंने अक्सर सनसनीखेज कहानियां सुनाईं। अगले चार दिनों में, हम ४ ऐसी कहानियों को समझेंगे और दूसरों के साथ परमेश्वर के प्रेम को बांटने की प्रेरणा पाएंगे।
7 दिन
मनुष्य होने के नाते और खासतौर पर मसीही होने के नाते, कई स्त्तर पर अपने परिवार, दोस्त, मालिक और कार्यस्थल के लोगों के प्रति परमेश्वर को जवाब देने की ज़िम्मेदारी हम पर है| मनुष्य स्वभाव से ही किसी के प्रति उत्तरदायी होना पसंद नहीं करता| परमेश्वर को हिसाब-किताब देना ही मूल रूप से सभी स्त्तर पर उत्तरदायी होने में हमारी मदद करता है|
30 दिन
यीशु मसीह अक्सर मामूली, लेकिन गहरे अर्थ वाली कहानियों से सिखाता था। ये रूहानी सच्चाइयाँ और क़ायम रहने वाले सबक़ सुनने वालों के दिलों को छू जाते थे। जब हम इन्हें उसी दौर के नज़रिये से समझते हैं, जैसे पहले सुनने वालों ने सुना था, तब हम भी इनके, ज़िंदगी बदल देने वाले असर को अनुभव कर सकते हैं।
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