जसो त्यो कयो,
जाईन इन मानसो छे कय
कि सोमवता ती रोवछे, पुन नी समझे,
आरू देखता रोवछे, पुन नी समझे।
काहकि इन मानसोन मन मोट
आरू इन्दरा कान्टा भारी होय गया छे,
आरू चे आपसा डुवा बंद कर्या छे,
ओसो नी होय कि वो कदी डुवा छे देख्या,
आरू कान्टा छे सोमव्या,
आरू मन समझे
आरू म्हार तरफ फिरिया,
आरू हाव तीनुक वारू करियो।