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मत्ती 5:1-5 - सभी संस्करणों की तुलना करें

मत्ती 5:1-5 HINCLBSI (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))

येशु विशाल जनसमूह को देखकर पहाड़ी पर चढ़े और वहाँ बैठ गये। उनके शिष्‍य उनके पास आए और वह यह कहते हुए उन्‍हें शिक्षा देने लगे : “धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं; क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है। धन्‍य हैं वे, जो शोक करते हैं; क्‍योंकि उन्‍हें सान्‍त्‍वना मिलेगी। धन्‍य हैं वे जो नम्र हैं; क्‍योंकि वे पृथ्‍वी के अधिकारी होंगे।

मत्ती 5:1-5 HINOVBSI (पवित्र बाइबिल OV (Re-edited) Bible (BSI))

वह इस भीड़ को देखकर पहाड़ पर चढ़ गया, और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। और वह अपना मुँह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगा : “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। “धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएँगे। “धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।

मत्ती 5:1-5 HHBD (Hindi Holy Bible)

वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। और वह अपना मुंह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगा, धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।

मत्ती 5:1-5 HERV (पवित्र बाइबल)

यीशु ने जब यह बड़ी भीड़ देखी, तो वह एक पहाड़ पर चला गया। वहाँ वह बैठ गया और उसके अनुयायी उसके पास आ गये। तब यीशु ने उन्हें उपदेश देते हुए कहा: “धन्य हैं वे जो हृदय से दीन हैं, स्वर्ग का राज्य उनके लिए है। धन्य हैं वे जो शोक करते हैं, क्योंकि परमेश्वर उन्हें सांत्वना देता है धन्य हैं वे जो नम्र हैं क्योंकि यह पृथ्वी उन्हीं की है।

मत्ती 5:1-5 IRVHIN (इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019)

वह भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। और वह अपना मुँह खोलकर उन्हें यह उपदेश देने लगा: “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। “धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शान्ति पाएँगे। “धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। (भज. 37:11)

मत्ती 5:1-5 HCV (सरल हिन्दी बाइबल)

जब येशु मसीह ने भीड़ को देखा तो वे पर्वत पर चले गए और जब वह बैठ गए तो उनके शिष्य उनके पास आए. येशु मसीह ने उन्हें शिक्षा देना प्रारंभ किया. उन्होंने कहा, “धन्य हैं वे, जो दीन आत्मा के हैं, क्योंकि स्वर्ग-राज्य उन्हीं का है. धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं. क्योंकि उन्हें शांति दी जाएगी. धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे ही पृथ्वी के उत्तराधिकारी होंगे.