एक वर्ष 2019 में बाइबलनमूना

एक वर्ष 2019 में बाइबल

दिन 64 का 365

स्वस्थ कैसे बने रहें

  • धूम्रपान और तंबाकू से बने उत्पादों का सेवन न करें  
  • हरदिन शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
  • स्वास्थयवर्धक भोजन करें
  • अपना उचित वचन बनाए रखें
  • अपना सही रक्त चाप को बनाए रखें
  • अपने कोलेस्ट्रोल पर संपूर्ण नियंत्रण रखें
  • अपने रक्त में उचित शर्करा बनाए रखें

 

अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, आपके हृदय को स्वस्थय बनाए रखने के लिए इन सात बातों को करना जरूरी है.

एक मनुष्य के हृदय का वचन एक पाउंड (450 ग्राम) से कम होता है. यह एक दिन में 1,00,000 बार धड़कता है और जीवनकाल में औसतन 2.5 बिलियन बार धड़कता है. आपकी रक्त वाहनियाँ – धमनियाँ, शिराएं और रक्त कोशिकाएं – 60,000 मील से भी ज्यादा लंबी हैं – पूरी दुनिया का दो चक्कर लगाने से भी ज्यादा.

यह एक आश्चर्यजनक कौतुक नहीं है; यह मानवीय जीवन का हृदय है. आपके हृदय के बिना आपका शरीर शीघ्र ही काम करना बंद कर देगा. पश्चिमी दुनिया में हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है.

यीशु ने हृदय के बारे में जोर देकर कहा है. हृदय आंतरिक जीवन की उपमा है. यीशु के इस शब्द का अर्थ शारीरिक, आत्मिक और मानसिक आधार है. हृदय संपूर्ण आंतरिक जीवन – सोचने, महसूस करने और इच्छा करने का स्रोत है.    

परमेश्वर मुख्य रूप से आपके हृदय की चिंता करते हैं. वह चाहते हैं कि आपका हृदय स्वस्थ रहे. उन्होंने शमूएल से कहा, 'न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि परमेश्वर का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि मन पर रहती है' (1शमूएल 16:7).

बल्कि शारीरिक हृदय के स्वस्थ रहने से ज्यादा महत्वपूर्ण आपके आत्मिक हृदय की स्थिति है. आज के इस लेखांश में हम देखेंगे कि अपने आत्मिक हृदय को कैसे स्वस्थ रखा जाए.

नीतिवचन 6:20-29

अपने मन की रक्षा करें

 

यीशु ने सिखाया कि व्यभिचार मन से शुरू होता है. उन्होंने ऐसा कहा था, ' मैं तुम से यह कहता हूँ, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका' (मत्ती 5:28). उनकी शिक्षा नीतिवचन पर जाती है जहाँ लेखक मन के महत्व पर जोर देता है – 'उसकी सुन्दरता देख कर अपने मन में उसकी अभिलाषा न कर' (नीतिवचन 6:25).  

 

वह व्यभिचार के भयंकर खतरे के बारे में चेतावनी देता है. हम आग के समान बहुत ही शक्तिशाली चीज से निपट रहे हैं. अपनी सही जगह में (अग्नीकुंड के जैसे) विवाह में लैंगिकता एक बड़ी आशीष है.

 

मगर, यदि आप अपनी लैंगिक अभिलाषा को गलत दिशा में जाने दें तो यह आपकी छाती पर रखी अग्नी के समान है: ' क्या हो सकता है कि कोई अपनी छाती पर आग रख ले; और उसके कपड़े न जलें? क्या हो सकता है कि कोई अंगारे पर चले, और उसके पांव न झुलसें? जो पराई स्त्री के पास जाता है, उसकी दशा ऐसी है; वरन जो कोई उस को छूएगा वह दण्ड से न बचेगा' (वव.27-29).  

 

व्यभिचार कहीं और से नहीं आता. बेवफाई मन से शुरू होती है. यहीं पर आपको आत्म-अनुशासन में रहना है. बुद्धि के इन शब्दों को अपने हृदय में सदा गांठ बान्ध कर रख लो और अपने गले का हार बना लो.(व.21).

 

प्रभु मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने इन शब्दों को मेरे हृदय में सदा के लिए गांठ बांध दिया है. जब मैं चलूं, तो आप मेरा मार्गदर्शन कीजिये. जब मैं सोऊँ, तो आप मुझ पर नजर रखिये. जब मैं जागूँ, तो ये मुझ से बातें करें. ये मेरे मार्ग के लिए दीपक बनें और मेरे जीवन के मार्ग को प्रकाशमान कर दें. प्रभु, मेरे मन की चौकसी कीजिये.  

मरकुस 12:28-44

पूरे मन से यीशु से प्रेम करें

 

मरकुस 12:28-37

यीशु की शिक्षा के बारे में$ कुछ प्रसन्न कर देने वाली बातें हैं: ' और भीड़ में लोग उसको आनन्द से सुनते थे' (व.37ब). यदि मुझे इन शिक्षाओं के एक शब्द को संक्षिप्त करने के लिए कहा जाए, तो मैं 'प्रेम' शब्द का उपयोग करना चाहूँगा.

जब यीशु से शास्त्रीयों ने पूछा कि सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा कौन सी है, तो उन्होंने उत्तर दिया, 'तू अपने प्रभु परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं' (वव.30-31). इस संदेश की मुख्य बात यह है कि अपने प्रभु परमेश्वर से प्रेमपूर्ण संबंध बनाए रख, जो कि आपके मन से शुरू होता है और दूसरों को प्रेम करने के रूप में बाहर आता है.

प्रभु कौन हैं? इन सब पहेली के बीच यह प्रश्न उभर कर आता है, 'यह मनुष्य खुद को क्या समझता है?' मंदिर में यीशु उन्हें मसीह के आने के पूर्वानुमान के बारे में चुनौती देते हुए बाजी पलट देते हैं ('मसीहा' व.35).

वह भजनसंहिता 110 का उद्धरण करते हुए उनसे प्रश्न पूछते हैं. वह इस विचार को चुनौती देते हैं कि मसीहा दाऊद के वंशज से एक राजा होगा. वह दाऊद का पुत्र नहीं होगा, बल्कि वह दाऊद का प्रभु होगा (मरकुस 12:35-37अ).

 अब हम जानते हैं कि यीशु ही 'प्रभु' हैं. पूरे दिल से प्रभु से प्रेम करने की आज्ञा का अर्थ है अपने पूरे दिल से यीशु से प्रेम करना. इसे अपने जीवन की सबसे पहली प्राथमिकता बनाइये.

यीशु को विधि सम्मत या शब्दार्थ की परवाह नहीं थी, बल्कि आत्मा के व्यवस्था की परवाह थी. वह बाहरी रूप रंग की परवाह नहीं करते, बल्कि हृदय की.

अपने दिल पर ध्यान केंद्रित करें     

मरकुस 12:38-40   

खुद के बारे में कहते हुए, मैंने पाया कि कपट मेरे जीवन के लिए हमेशा खतरनाक रहा है. यह पदवी, मंच, शीर्षक, और सम्मान पाने के लिए चिंता करने के बारे में है. और लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रार्थना करने के बारे में हमें सावधान रहना होगा, इसके बजाय हम दिल से प्रार्थना करें.

यीशु अपने दिनों के लीडर्स की निंदा करते हैं, उनके दिल साफ नहीं थे. वे अपने हृदय के बजाय बाहरी रूप रंग के बारे में ज्यादा परवाह करते थे. वह कहते हैं, 'शास्त्रियों से चौकस रहो, जो लम्बे वस्त्र पहने हुए फिरते। और बाजारों में नमस्कार, और आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और जेवनारों में मुख्य मुख्य स्थान भी चाहते हैं। वे विधवाओं के घरों को खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं, ये अधिक दण्ड पाएंगे' (वव.38-40).

ये सभी बातें लोगों से प्रेम करने और उनसे सम्मान प्राप्त करने के बीच के फर्क को दर्शाती हैं. लेकिन परमेश्वर आपकी हैसियत और 'दिखावे' की परवाह नहीं करते (व.40). वह हमारे हृदय की परवाह करते हैं. 

  दिल से दीजिये

मरकुस 12:41-44 

यीशु आपके जेब के आकार की परवाह नहीं करते. वह आपके दिल की परवाह करते हैं. 

यीशु ने पुराने रीति रिवाजों का विरोध किया जिसमें परमेश्वर के लिए दी गई बड़ी भेंट, छोटी भेंट भी ज्यादा मायने रखती थी. उन्होंने हमें बताया कि केवल धनी मनुष्य ही नहीं बल्कि गरीब मनुष्य भी भेंट देने के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं. वह कहते हैं धनी मनुष्य के द्वारा गरीब की तुलना में अत्यधिक धन दिया जाना पर्याप्त नहीं है. यीशु उदारता से देने वाले हृदय को देख रहे थे.

हम क्या देते हैं और हम जिस तरह से देते हैं, वह हमारे हृदय को प्रतिबिंबित करता है. वास्तव में यीशु धनी लोगों की निंदा नहीं करते जो बड़ी रकम देते हैं. बल्कि वह कहते हैं कि विधवा स्त्री जिसने 'तांबे के दो सिक्के दिये थे, जिसकी कीमत चंद पैसे थे' (व.42), उसका मूल्य दूसरों से भी ज्यादा है.     

यीशु उसका हृदय देखते हैं और वास्तव में 'मन्दिर के भण्डार में डालने वालों में से इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। 
44 क्योंकि सब ने अपने धन की बढ़ती में से डाला है, परन्तु इस ने अपनी घटी में से जो कुछ उसका था, अर्थात अपनी सारी जीविका डाल दी है' (वव.43-44).

 प्रभु अपने सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति से आपसे प्रेम करने में मेरी मदद कीजिये. उस समय के लिए मुझे क्षमा कीजिये जब मैं अपनी हैसीयत और दिखावे की ज्यादा परवाह करता था, और मेरी मदद कीजिये कि मैं अपना ध्यान बाहरी दिखावे के बजाय अपने दिल पर केन्द्रित करूँ. प्रभु उदारता से देने में मेरी मदद करिए. और मुझे उदार हृदय दीजिये.   

लैव्यव्यवस्था 13:1-59

अपने हृदय को पवित्र रखें

पुराने नियम ने जीवन के हरएक पहलू पर ध्यान दिया है जिसमे शुद्धता, स्वास्थय और स्वच्छता शामिल है. इसके परिणाम स्वरूप, हम पुराने नियम में होमबलि और बलिदान के अलावा इन व्यवस्थाओं के बारे में पढ़ते हैं जिन्हें इस अध्याय में स्थापित किया गया था. ये सभी नियम और व्यवस्था पवित्रता के बारे में थीं, हालांकि उनका उद्देश्य परमेश्वर को प्रसन्न करना और उनका अनुकरण करना था (लैव्यवयवस्था 11:44). दूसरे शब्दों में, बाहरी रीति रिवाजों द्वारा हृदय की आंतरिक बातों को उजागर करना था.

यीशु के समय में कई शास्त्री गलत बातों पर जोर दिया करते थे. उनका मानना था कि अनेक नियमों का पालन करने के द्वारा पवित्रता पाई जा सकती है जिनका संबंध बाहरी व्यवहार और कार्यों से था, बजाय इसके कि उनका हृदय परमेश्वर की ओर आज्ञाकारी बना रहे.

यीशु ने बताया कि इन सब के अलावा कुछ और है जो ज्यादा महत्वपूर्ण है. जैसा कि हम आज के नये नियम के लेखांश में देखा, 'अपने सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति के साथ परमेश्वर से प्रेम रखना और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना' (मरकुस 12:33). पवित्रता बाहरी दिखावे का मामला नहीं है. यह हृदय का मामला है. 

प्रभु मेरा हृदय स्वस्थ और पवित्र रखने में मेरी मदद कीजिये और आत्मिक रोगों से मेरी रक्षा कीजिये. हम आपसे प्रेम रखने वाले और दूसरों से प्रेम करने वाले समाज बनें. कृपया आज मेरा हृदय अपनी पवित्र आत्मा से भर दीजिये और मेरे हृदय को पवित्र और स्वस्थ बनाए रखिये.  

Pippa Adds

पीपा विज्ञापन

 

 मरकुस 12:31

 

यीशु ने कहा 'अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो' (मरकुस 12:31). मैं खुद की देखभाल कैसे करता हूँ? मुझे लगता है, अच्छी तरह से!!!    

 

References

नोट्स:

अमेरीकन हार्ट एसोसिएशन, 'लाइफ इज सिम्पल 7' , http://www.heart.org/HEARTORG/Conditions/My-Life-Check---Lifes-Simple-7_UCM_471453_Article.jsp#.VqvcnbSp8Rk [Last accessed January 2016]

 

जहाँ पर कुछ बताया न गया हो, उन वचनों को पवित्र बाइबल, न्यू इंटरनैशनल संस्करण एन्ग्लिसाइड से लिया गया है, कॉपीराइट © 1979, 1984, 2011 बिबलिका, पहले इंटरनैशनल बाइबल सोसाइटी, हूडर और स्टोगन पब्लिशर की अनुमति से प्रयोग किया गया, एक हॅचेट यूके कंपनी सभी अधिकार सुरक्षित। ‘एनआईवी’, बिबलिका यू के का पंजीकृत ट्रेडमार्क संख्या 1448790 है। 

       

जिन वचनों को (एएमपी, AMP) से चिन्हित किया गया है उन्हें एम्प्लीफाइड® बाइबल से लिया गया है. कॉपीराइट © 1954, 1958, 1962, 1964, 1965, 1987 लॉकमैन फाउंडेशन द्वारा प्राप्त अनुमति से उपयोग किया गया है। (www.Lockman.org)

 

 जिन वचनों को (एमएसजी MSG) से चिन्हित किया गया है उन्हें मैसेज से लिया गया है। कॉपीराइट © 1993, 1994, 1995, 1996, 2000, 2001, 2002. जिनका प्रयोग एनएवीप्रेस पब्लिशिंग ग्रुप की अनुमति से किया गया है।

दिन 63दिन 65

इस योजना के बारें में

एक वर्ष 2019 में बाइबल

दुनिया भर में 20 लाख से अधिक अनुमानित प्रयोक्ताओं के साथ, Bible in One Year, एक प्रमुख दैनिक बाइबल पठन की योजना है। प्रत्येक दिन आपको, एक प्साल्म या नीतिवचन पाठ, एक न्यूटेस्टामेंट पाठ और एक ओल्ड टेस्टामेंट पाठ प्राप्त होगा। फिर निकी और पिप्पा गंबेल, अंतर्दृष्टिपूर्ण कमेंटरी प्रदान करते हैं, जो कि बाइबल के साथ-साथ पाठों के बारे में ताज़ा समझ प्रदान करने के लिएपढ़े या सुने जाने के लिए है। निकी लंदन में HTB चर्च के पादरी और Alpha के अग्रदूत हैं।

More

अपने दिन Bible in One Year के साथ शुरू करें जो कि निकी और पिप्पा गंबेल की टिप्पणी के साथ लंदन के HTB चर्च से एक बाइबल पठन की योजना है।.हम इस योजना को प्रदान करने के लिए निकी और पिपा गंबेल, एचटीबी का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें: https://www.bibleinoneyear.org/